Thursday, 12 February 2026
The world keep moving but I feel struck
Monday, 9 February 2026
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Sunday, 8 February 2026
Yaadein
Wednesday, 7 January 2026
mutual
Saturday, 3 January 2026
Garud Ki Kahani
गरुड़ की कहानी
एक दिन भगवान विष्णु, शिव जी से मिलने कैलाश पर्वत पहुंचे। उनके साथ उनके वाहन गरुड़ भी थे। विष्णु जी ने गरुड़ को कैलाश पर्वत के बाहर ही इंतजार करने को कहा और शिवजी से मिलने चले गए। गरुड़ बाहर अकेले थे और इस एकांत समय में वो कैलाश की खूबसूरती को निहार रहे थे और सोच ही रहे थे कि उनकी नजर एक छोटे से पक्षी पर पड़ी जो कि वहां एक चोटी पर बैठा था। पक्षी को देखकर, गरुड़ ने सोचा कि "यह रचना कितनी अद्भुत है! जिसने इन ऊंचे पहाड़ों को बनाया है, उसने इस छोटे पक्षी को भी बनाया है और दोनों समान रूप से अद्भुत लगते हैं।" तभी मृत्यु के देवता यम, जो भैंसे पर सवार होकर शिव से मिलने के इरादे से वहां से गुजरे। जैसे ही यम कैलाश आए उनकी नज़र उस पक्षी पर पड़ी और कुछ सेकेंड उसको ध्यान से देखने के बाद फिर वो शिवजी से मिलने अंदर चले गए।
यम को मृत्यु के देवता माना जाता है इसीलिए गरुड़ को लगा कि अगर यम ने इस पक्षी को ध्यान से देखा है तो मतलब इसकी मृत्यु अब आ गई है। अब कुछ ही देर में यम बाहर आएंगे और इस पक्षी की आत्मा को साथ ले जाएंगे। गरुड़ को उस पक्षी पर दया आ गई और उसे यम से बचाने के लिए गरुड़ ने उस छोटे से पक्षी को अपने शक्तिशाली पंजे में पकड़ा और कैलाश के हजारों मील दूर एक जंगल में ले गए और एक नाले के पास चट्टान पर उस पक्षी को छोड़ आए। उन्हें लगा कि अगर पक्षी कैलाश पर होगा ही नहीं तो यम किसे ले जाएंगे।
इसके बाद गरुड़ कैलाश लौट आए। इतनी देर में यम अंदर से निकले और गरुड़ को नमस्कार किया, तो गरुड़ बोल उठे, कि यम देवता आपसे एक सवाल पूछूं?
यम ने कहा कि पूछिए, तो गरुड़ बोले कि, अंदर जाते समय आपने एक पक्षी को देखा और एक पल के लिए आप चिंतित हो गए, क्यों?"
यम ने उत्तर दिया "हां, जब मेरी नजर उस छोटे पक्षी पर पड़ी, तो मैंने देखा कि वह कुछ ही मिनटों में मर जाएगा, उसे यहां से बहुत दूर जंगल में एक नाले के पास एक अजगर ने निगल लिया है। मुझे आश्चर्य हुआ कि यह छोटा पक्षी कैसे इतने कम समय में अपने भाग्य से अलग होकर हजारों मील की दूरी तय कर लेगा। फिर मैं भूल गया। निश्चित रूप से यह किसी तरह हुआ होगा।" यह कहकर यम मुस्कुराए और चले गए।
यम की बात सुनकर गरुड़ को एहसास हुआ कि वो नियति बदलने की सोच रहे थे और खुद नियति का हिस्सा बन गए। वाकई मृत्यु अटल है, इसे टाला नहीं जा सकता। हर किसी के अपने कर्म होते हैं इनमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।